Indian Team Qualified For World Cup With Six Gold Medals – छह स्वर्ण पदकों के साथ भारतीय टीम विश्वकप के लिए क्वालीफाई – NOFAA

Indian Team Qualified For World Cup With Six Gold Medals – छह स्वर्ण पदकों के साथ भारतीय टीम विश्वकप के लिए क्वालीफाई

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तिरंगे के साथ भारतीय टीम के खिलाड़ी
– फोटो : Grnoida

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ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के मैदान पर खेले जा रहे इंटरनेशनल टेंट पेगिंग फेडरेशन (आईटीपीएफ) विश्वकप क्वालीफायर मुकाबले में बृहस्पतिवार को भारतीय टीम के घुड़सवारों ने तीन और स्वर्ण पदक जीतकर वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले टेंट पेगिंग विश्वकप के लिए क्वालीफाई कर लिया है।
पांच देशों के घुड़सवारों की मौजूदगी में भारतीय टेंट पेगिंग टीम के खिलाड़ियों ने कुल छह स्वर्ण पदक जीतकर 515 अंक बटोरे और पहला स्थान हासिल किया। कुल 7 स्पर्धाओं में एक को छोड़कर सभी में भारतीय टीम के घुड़सवारों को सफलता मिली। वहीं, 482.5 अंकों के साथ पाकिस्तान दूसरे स्थान पर रहा। कड़ी टक्कर देने के बावजूद पाकिस्तान कुछ अंकों से विश्वकप में जगह बनाने से चूक गया। नेपाल ने 457.5 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।
बेलारूस और यूएसए के घुड़सवार क्वालीफायर मुकाबले में अपना रंग नहीं जमा सके। दोनों टीमें क्रमश: 220.5 और 183.5 अंक जुटाकर चौथे व पांचवें स्थान पर रहीं। भारतीय टीम के दिनेश जी. कारलेकर, बीआर जेना, संदीप और मोहित कुमार ने विश्वकप के लिए दावेदारी पेश की। तीन दिन तक चले मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले दिन एक, दूसरे दिन दो और अंतिम दिन तीन स्वर्ण पदक हासिल किए। अंतिम दिन अन्य दिनों के मुकाबले दर्शकों की संख्या में भी इजाफा हुआ। 100 से अधिक दर्शकों ने भारतीय दल का हौसला बढ़ाया।
कोच और मैनेजर अहमद अफसर ने कहा कि भारतीय टीम ने टेंट पेगिंग विश्वकप के लिए क्वालीफाई कर देश को खुश होने का मौका दिया है। क्वालीफायर मुकाबले की तरह भारतीय घुड़सवार विश्वकप में भी दमदार प्रदर्शन करेंगे और मजबूत दावेदारी पेश करेंगे। आईटीपीएफ बोर्ड के मेंबर आबिद तरीन ने कहा कि इस एतिहासिक सफलता को हमेशा याद किया जाएगा। कोरोना के कारण दो देश प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके, इसके बावजूद मुकाबला कांटे का रहा।
इशारे पर घोड़े को दौड़ाकर स्वर्णिम दांव लगाती हैं यशिका
ड्रेसाज यानी घुड़सवारी की वह स्पर्द्धा, जिसमें घोड़े को तेज दौड़ाना नहीं बल्कि धीमे-धीमे कलात्मक चाल से चलाना असली जीत मानी जाती है। ऐसी कलात्मक स्पर्द्धा में घोड़े को अपने इशारे पर चलाकर स्वर्णिम दांव लगाती हैं यशिका कक्कड़ सलवान। महज 13 साल की यशिका ड्रेसाज की चैंपियन तो हैं ही शो जंपिंग और रिंग एंड पेग जैसी बहादुरी भरी स्पर्द्धाओं में भी अपने घोड़े के साथ पलक झपकते ही कठिन लक्ष्य हासिल आसानी से हासिल कर लेती हैं। इसी का नतीजा है कि जेपी विश टाउन स्थित यशिका के घर में टंगे करीब दर्जन भर मेडल और ट्रॉफियां शोभा बढ़ा रहे हैं।
अफ्रीका में पोलो क्लब में घोड़े को दौड़ते देख यशिका 6 साल की उम्र में घुड़सवारी से दिल लगा बैठीं। मां मीनू कक्कड़ के मुताबिक, साल 2015 में दुबई में 8 साल की उम्र में यशिका ने घुड़सवारी सीखना शुरू किया। शुरुआत में कई बार घोड़े से गिरीं और चोटें भी लगीं, लेकिन घुड़सवारी में कमाल दिखाने का जुनून यशिका को घोड़ों से दूर नहीं कर पाया। प्रोमैथ्यूज स्कूल में पढ़ रहीं यशिका तब से लगातार घोड़े की पीठ पर कमाल ही करती आई हैं।
इक्वीविंग्स राइडिंग एकेडमी में तीन साल से घुड़सवारी का हुनर निखार रहीं यशिका अब तक यूपी स्टेट चैंपियनशिप, द पेंटा ग्रांड समेत बहुत सी स्पर्द्धाओं में 8 गोल्ड के साथ कुल 13 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। ड्रेसाज और शो जंपिंग में नेशनल इक्वेस्टेरियन चैंपियनशिप की तैयारी कर रहीं यशिका का सपना एक दिन इस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के मैदान पर खेले जा रहे इंटरनेशनल टेंट पेगिंग फेडरेशन (आईटीपीएफ) विश्वकप क्वालीफायर मुकाबले में बृहस्पतिवार को भारतीय टीम के घुड़सवारों ने तीन और स्वर्ण पदक जीतकर वर्ष 2023 में दक्षिण अफ्रीका में होने वाले टेंट पेगिंग विश्वकप के लिए क्वालीफाई कर लिया है।

पांच देशों के घुड़सवारों की मौजूदगी में भारतीय टेंट पेगिंग टीम के खिलाड़ियों ने कुल छह स्वर्ण पदक जीतकर 515 अंक बटोरे और पहला स्थान हासिल किया। कुल 7 स्पर्धाओं में एक को छोड़कर सभी में भारतीय टीम के घुड़सवारों को सफलता मिली। वहीं, 482.5 अंकों के साथ पाकिस्तान दूसरे स्थान पर रहा। कड़ी टक्कर देने के बावजूद पाकिस्तान कुछ अंकों से विश्वकप में जगह बनाने से चूक गया। नेपाल ने 457.5 अंकों के साथ तीसरा स्थान हासिल किया।

बेलारूस और यूएसए के घुड़सवार क्वालीफायर मुकाबले में अपना रंग नहीं जमा सके। दोनों टीमें क्रमश: 220.5 और 183.5 अंक जुटाकर चौथे व पांचवें स्थान पर रहीं। भारतीय टीम के दिनेश जी. कारलेकर, बीआर जेना, संदीप और मोहित कुमार ने विश्वकप के लिए दावेदारी पेश की। तीन दिन तक चले मुकाबले में भारतीय टीम ने पहले दिन एक, दूसरे दिन दो और अंतिम दिन तीन स्वर्ण पदक हासिल किए। अंतिम दिन अन्य दिनों के मुकाबले दर्शकों की संख्या में भी इजाफा हुआ। 100 से अधिक दर्शकों ने भारतीय दल का हौसला बढ़ाया।

कोच और मैनेजर अहमद अफसर ने कहा कि भारतीय टीम ने टेंट पेगिंग विश्वकप के लिए क्वालीफाई कर देश को खुश होने का मौका दिया है। क्वालीफायर मुकाबले की तरह भारतीय घुड़सवार विश्वकप में भी दमदार प्रदर्शन करेंगे और मजबूत दावेदारी पेश करेंगे। आईटीपीएफ बोर्ड के मेंबर आबिद तरीन ने कहा कि इस एतिहासिक सफलता को हमेशा याद किया जाएगा। कोरोना के कारण दो देश प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सके, इसके बावजूद मुकाबला कांटे का रहा।

इशारे पर घोड़े को दौड़ाकर स्वर्णिम दांव लगाती हैं यशिका

ड्रेसाज यानी घुड़सवारी की वह स्पर्द्धा, जिसमें घोड़े को तेज दौड़ाना नहीं बल्कि धीमे-धीमे कलात्मक चाल से चलाना असली जीत मानी जाती है। ऐसी कलात्मक स्पर्द्धा में घोड़े को अपने इशारे पर चलाकर स्वर्णिम दांव लगाती हैं यशिका कक्कड़ सलवान। महज 13 साल की यशिका ड्रेसाज की चैंपियन तो हैं ही शो जंपिंग और रिंग एंड पेग जैसी बहादुरी भरी स्पर्द्धाओं में भी अपने घोड़े के साथ पलक झपकते ही कठिन लक्ष्य हासिल आसानी से हासिल कर लेती हैं। इसी का नतीजा है कि जेपी विश टाउन स्थित यशिका के घर में टंगे करीब दर्जन भर मेडल और ट्रॉफियां शोभा बढ़ा रहे हैं।

अफ्रीका में पोलो क्लब में घोड़े को दौड़ते देख यशिका 6 साल की उम्र में घुड़सवारी से दिल लगा बैठीं। मां मीनू कक्कड़ के मुताबिक, साल 2015 में दुबई में 8 साल की उम्र में यशिका ने घुड़सवारी सीखना शुरू किया। शुरुआत में कई बार घोड़े से गिरीं और चोटें भी लगीं, लेकिन घुड़सवारी में कमाल दिखाने का जुनून यशिका को घोड़ों से दूर नहीं कर पाया। प्रोमैथ्यूज स्कूल में पढ़ रहीं यशिका तब से लगातार घोड़े की पीठ पर कमाल ही करती आई हैं।

इक्वीविंग्स राइडिंग एकेडमी में तीन साल से घुड़सवारी का हुनर निखार रहीं यशिका अब तक यूपी स्टेट चैंपियनशिप, द पेंटा ग्रांड समेत बहुत सी स्पर्द्धाओं में 8 गोल्ड के साथ कुल 13 मेडल अपने नाम कर चुकी हैं। ड्रेसाज और शो जंपिंग में नेशनल इक्वेस्टेरियन चैंपियनशिप की तैयारी कर रहीं यशिका का सपना एक दिन इस खेल में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

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