Suspicion Of Parents Increased Due To Calling Children In Schools – स्कूलों में बच्चों को बुलाने पर संशय अभिभावकों की बढ़ी परेशानी – NOFAA

Suspicion Of Parents Increased Due To Calling Children In Schools – स्कूलों में बच्चों को बुलाने पर संशय अभिभावकों की बढ़ी परेशानी

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शिकायती पत्र सौंपते पदाधिकारी।

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नोएडा। कोरोना संकट के कारण यूपी में स्कूलों को 4 अप्रैल तक बंद कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद स्कूल खुलेंगे या छुट्टी का समय आगे बढ़ाया जाएगा या फिर ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प मिलेगा आदि तमाम सवाल अभिभावकों की चिंता का विषय बने हैं। स्कूलों में बच्चों को बुलाने पर संशय तो अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी है।
कोरोना के कारण अधिकतर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं, स्कूलों के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन शिक्षा व्यवस्था एक साथ चलाना आसान नहीं है। परीक्षाओं का समय नजदीक आने के कारण अभिभावक, स्कूल और बच्चे चिंतित हैं। 4 अप्रैल के बाद सोमवार से नए सत्र की कक्षाएं शुरू होंगी। ऐसे में अभिभावक परेशान हैं। हाल ही में गौतमबुद्ध नगर पेरेंट्स वेलफेयर सोसाइटी (जीपीडब्ल्यूएस) ने सर्वे कराया था।
गूगल फार्म के माध्यम से हुए इस सर्वे में 91.6 फीसदी अभिभावकों ने स्कूल खोलने पर असहमति जताई। महज 5 फीसदी ने ही स्कूल खोलने के लिए हामी भरी। बाकी कोरोना की स्थिति देखते हुए निर्णय लेंगे। तीन दिवसीय सर्वे में 40 स्कूलों से 650 से अधिक अभिभावकों ने हिस्सा लिया। प्रदेश सरकार ने 4 अप्रैल से 50 फीसदी बच्चों के साथ स्कूलों को खोलने की अनुमति दी है, लेकिन अभिभावकों की मंजूरी आवश्यक होगी।
जीपीडब्ल्यूएस के संस्थापक मनोज कटारिया ने कहा कि कोरोना के मामले बढ़ने से अभिभावकों में डर है। ज्यादातर स्कूल दिशा-निर्देशों का पालन करने में असमर्थ हैं। ऐसे में अभिभावक चाहते हैं कि जिला प्रशासन स्कूलों की स्थिति का जायजा लेकर ही निर्णय ले। जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मवीर सिंह ने कहा कि स्कूल खुलने का निर्णय शासन के निर्देश अनुसार होगा। स्कूल जब भी खुलेंगे, कोरोना गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
आरटीई के तहत दाखिले में गड़बड़ी का आरोप, कार्रवाई की मांग
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के दाखिले पर निजी स्कूलों एवं अभिभावकों के बीच विवाद बढ़ रहा है। युवा क्रांति सेना के सदस्यों ने निजी स्कूल पर मनमानी और इस वर्ष दाखिले में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। इस संबंध में एडीएम प्रशासन दिवाकर सिंह और कार्यवाहक खंड शिक्षा अधिकारी संजय उपाध्याय से मुलाकात कर शिकायती पत्र भी सौंपा है। साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
संगठन के सदस्यों ने बताया कि तथ्यों को पेश करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा की गई गड़बड़ी के संबंध में प्रशासन को अवगत कराया गया है। इसमें बड़े स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत दाखिले की सीटों के गलत आवंटन और कई आवेदनों को गलत तरीके से रिजेक्ट करने की जानकारी दी गई है। मांग की है कि सीटों के गलत आवंटन की जांच कर दोषी स्कूल और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। इस दौरान निजी स्कूलों द्वारा पिछले वर्ष के चयनित बच्चों को दाखिले नहीं देने पर भी चर्चा हुई।
प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जल्द से जल्द दाखिले करवाने का आश्वासन दिया है। साथ ही रिजेक्ट आवेदनों को सही से सत्यापित करने की भी बात कही है। युवा क्रांति सेना के संस्थापक अविनाश सिंह ने आरोप लगाया कि इस वर्ष बड़े निजी स्कूलों का गलत तरीके से सत्यापन कर गलत मैपिंग की गई। स्कूलों में कुल दाखिले न के बराबर दिखाकर आरटीई की लगभग 80 प्रतिशत सीट कम कर दी गई हैं। यह सब कुछ अधिकारियों और स्कूलों की मिलीभगत से हुआ है।

नोएडा। कोरोना संकट के कारण यूपी में स्कूलों को 4 अप्रैल तक बंद कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद स्कूल खुलेंगे या छुट्टी का समय आगे बढ़ाया जाएगा या फिर ऑनलाइन कक्षाओं का विकल्प मिलेगा आदि तमाम सवाल अभिभावकों की चिंता का विषय बने हैं। स्कूलों में बच्चों को बुलाने पर संशय तो अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी है।

कोरोना के कारण अधिकतर अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं हैं। वहीं, स्कूलों के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन शिक्षा व्यवस्था एक साथ चलाना आसान नहीं है। परीक्षाओं का समय नजदीक आने के कारण अभिभावक, स्कूल और बच्चे चिंतित हैं। 4 अप्रैल के बाद सोमवार से नए सत्र की कक्षाएं शुरू होंगी। ऐसे में अभिभावक परेशान हैं। हाल ही में गौतमबुद्ध नगर पेरेंट्स वेलफेयर सोसाइटी (जीपीडब्ल्यूएस) ने सर्वे कराया था।

गूगल फार्म के माध्यम से हुए इस सर्वे में 91.6 फीसदी अभिभावकों ने स्कूल खोलने पर असहमति जताई। महज 5 फीसदी ने ही स्कूल खोलने के लिए हामी भरी। बाकी कोरोना की स्थिति देखते हुए निर्णय लेंगे। तीन दिवसीय सर्वे में 40 स्कूलों से 650 से अधिक अभिभावकों ने हिस्सा लिया। प्रदेश सरकार ने 4 अप्रैल से 50 फीसदी बच्चों के साथ स्कूलों को खोलने की अनुमति दी है, लेकिन अभिभावकों की मंजूरी आवश्यक होगी।

जीपीडब्ल्यूएस के संस्थापक मनोज कटारिया ने कहा कि कोरोना के मामले बढ़ने से अभिभावकों में डर है। ज्यादातर स्कूल दिशा-निर्देशों का पालन करने में असमर्थ हैं। ऐसे में अभिभावक चाहते हैं कि जिला प्रशासन स्कूलों की स्थिति का जायजा लेकर ही निर्णय ले। जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मवीर सिंह ने कहा कि स्कूल खुलने का निर्णय शासन के निर्देश अनुसार होगा। स्कूल जब भी खुलेंगे, कोरोना गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

आरटीई के तहत दाखिले में गड़बड़ी का आरोप, कार्रवाई की मांग

शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के दाखिले पर निजी स्कूलों एवं अभिभावकों के बीच विवाद बढ़ रहा है। युवा क्रांति सेना के सदस्यों ने निजी स्कूल पर मनमानी और इस वर्ष दाखिले में गड़बड़ी का आरोप लगाया है। इस संबंध में एडीएम प्रशासन दिवाकर सिंह और कार्यवाहक खंड शिक्षा अधिकारी संजय उपाध्याय से मुलाकात कर शिकायती पत्र भी सौंपा है। साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

संगठन के सदस्यों ने बताया कि तथ्यों को पेश करते हुए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा की गई गड़बड़ी के संबंध में प्रशासन को अवगत कराया गया है। इसमें बड़े स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत दाखिले की सीटों के गलत आवंटन और कई आवेदनों को गलत तरीके से रिजेक्ट करने की जानकारी दी गई है। मांग की है कि सीटों के गलत आवंटन की जांच कर दोषी स्कूल और अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। इस दौरान निजी स्कूलों द्वारा पिछले वर्ष के चयनित बच्चों को दाखिले नहीं देने पर भी चर्चा हुई।

प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जल्द से जल्द दाखिले करवाने का आश्वासन दिया है। साथ ही रिजेक्ट आवेदनों को सही से सत्यापित करने की भी बात कही है। युवा क्रांति सेना के संस्थापक अविनाश सिंह ने आरोप लगाया कि इस वर्ष बड़े निजी स्कूलों का गलत तरीके से सत्यापन कर गलत मैपिंग की गई। स्कूलों में कुल दाखिले न के बराबर दिखाकर आरटीई की लगभग 80 प्रतिशत सीट कम कर दी गई हैं। यह सब कुछ अधिकारियों और स्कूलों की मिलीभगत से हुआ है।

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