Women Do Not Wear Masks Due To Fashion: Health Minister – फैशन की वजह से मास्क नहीं लगाती हैं महिलाएं : स्वास्थ्य मंत्री – NOFAA

Women Do Not Wear Masks Due To Fashion: Health Minister – फैशन की वजह से मास्क नहीं लगाती हैं महिलाएं : स्वास्थ्य मंत्री

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ग्रेटर नोएडा में आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित मंत्री, सांसद एवं विधायक।
– फोटो : Grnoida

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ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य व जिले के प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में एक अस्पताल के उद्घाटन समारोह में कोरोना से बचाव और महिलाओं के फैशन पर टिप्पणी की। उन्होंने मंच से कहा कि कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है कि कुछ समय तक फैशन से दूर रहें। आजकल महिलाओं को फैशन खराब होने का डर सताता है, इसलिए वह चेहरे पर मास्क लगाना पसंद नहीं करती हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना से बचाव के लिए मास्क को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने महाराष्ट्र और पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से कोरोना के केस फिर से बढ़ रहे हैं, यह स्थिति चिंताजनक है। इस स्थिति में मास्क लगाना और दो गज की दूरी के नियमों का पालन करना जरूरी है। महिलाएं मास्क नहीं लगाएंगी तो उनके कोरोना की चपेट में आने का डर रहेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने इस तरह की टिप्पणी प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर की है। हालांकि इसे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की टिप्पणी से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। जिसमें उन्होंने महिलाओं के फटी जींस पहनने पर टिप्पणी की थी।
दिल्ली से नजदीकी और कोरोना के बढ़ते मामले चिंतनीय : जय प्रताप
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नजदीकी और उत्तर प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामले चिंता का बड़ा कारण हैं। तीन मार्च को यूपी में कोरोना के कुल 77 मामले थे, वहीं अब यह संख्या 300 से अधिक हो गई है। ये बातें प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के पी-टू सेक्टर स्थित प्रकाश अस्पताल के उद्घाटन समारोह में कहीं। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाहर से आने वाले ज्यादातर लोग ट्रेन या हवाई जहाज से आ रहे हैं। इनका सबसे बड़ा केंद्र दिल्ली है। इसलिए दिल्ली की तरफ से आने वाली हवा को लेकर उचित कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी व सरकारी, निजी अस्पतालों को फिर से सतर्क रहने के संकेत दे दिए। उन्होंने मंच से कहा कि सरकारी अस्पताल व डॉक्टरों की फौज ग्रामीण स्तर पर सिर्फ 60 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाएं ही दे पाते हैं। शहरी क्षेत्र में मध्यम व उच्च वर्ग के लोगों के लिए निजी अस्पताल होना जरूरी है। मध्यम व उच्च वर्ग के लोग निजी अस्पतालों में उपचार कराने में सक्षम होते हैं।

ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य व जिले के प्रभारी मंत्री जय प्रताप सिंह ने शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा में एक अस्पताल के उद्घाटन समारोह में कोरोना से बचाव और महिलाओं के फैशन पर टिप्पणी की। उन्होंने मंच से कहा कि कोरोना से बचाव के लिए जरूरी है कि कुछ समय तक फैशन से दूर रहें। आजकल महिलाओं को फैशन खराब होने का डर सताता है, इसलिए वह चेहरे पर मास्क लगाना पसंद नहीं करती हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने कोरोना से बचाव के लिए मास्क को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने महाराष्ट्र और पंजाब का जिक्र करते हुए कहा कि जिस तरह से कोरोना के केस फिर से बढ़ रहे हैं, यह स्थिति चिंताजनक है। इस स्थिति में मास्क लगाना और दो गज की दूरी के नियमों का पालन करना जरूरी है। महिलाएं मास्क नहीं लगाएंगी तो उनके कोरोना की चपेट में आने का डर रहेगा। स्वास्थ्य मंत्री ने इस तरह की टिप्पणी प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को लेकर की है। हालांकि इसे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की टिप्पणी से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। जिसमें उन्होंने महिलाओं के फटी जींस पहनने पर टिप्पणी की थी।

दिल्ली से नजदीकी और कोरोना के बढ़ते मामले चिंतनीय : जय प्रताप

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से नजदीकी और उत्तर प्रदेश में कोरोना के बढ़ते मामले चिंता का बड़ा कारण हैं। तीन मार्च को यूपी में कोरोना के कुल 77 मामले थे, वहीं अब यह संख्या 300 से अधिक हो गई है। ये बातें प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा के पी-टू सेक्टर स्थित प्रकाश अस्पताल के उद्घाटन समारोह में कहीं। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में बाहर से आने वाले ज्यादातर लोग ट्रेन या हवाई जहाज से आ रहे हैं। इनका सबसे बड़ा केंद्र दिल्ली है। इसलिए दिल्ली की तरफ से आने वाली हवा को लेकर उचित कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए प्रशासनिक अधिकारी व सरकारी, निजी अस्पतालों को फिर से सतर्क रहने के संकेत दे दिए। उन्होंने मंच से कहा कि सरकारी अस्पताल व डॉक्टरों की फौज ग्रामीण स्तर पर सिर्फ 60 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाएं ही दे पाते हैं। शहरी क्षेत्र में मध्यम व उच्च वर्ग के लोगों के लिए निजी अस्पताल होना जरूरी है। मध्यम व उच्च वर्ग के लोग निजी अस्पतालों में उपचार कराने में सक्षम होते हैं।

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